दिल की अभिव्यक्ति

दिल की अभिव्यक्ति
दिल की अभिव्यक्ति

Friday, September 9, 2016

कल रात मुझको ख्वाब
में तेरा ख्याल आया
इक लम्हा यूं लगा कि
तुझे आस-पास पाया
धीरे से तुमने मेरे कानों
में कुछ कहा था
थी मेरी बदनसीबी
मैं समझ ही न पाया
अच्छा हुआ जो तुमने
ख्वाबों में ही सही
मेरे क़रीब आ कर
मुझको गले लगाया
मैं दुआ कर रहा हूँ
हक़ीक़त हो ख्वाब ये
"मुफलिस ने इस वजह से
सजदे में सर झुकाया
ऋषि राज शंकर 'मुफलिस'
  21/08/2016 सांय 6 बजे
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बड़ी आरज़ू थी कि हम साथ चलते
कभी लड़खड़ाते,कभी कुछ संभलते  
कभी तो हमारी मोहब्बत समझतीं
कभी तुम महकती कभी हम बहकते
कई बार  मंज़िल पे जा करके लौटे
कई बार  बिखरे, कई बार टूटे
कई बार दिल को दिलासा दिया है
रहे अरमां दिल में मचलते- मचलते
कई बार खुद को ही धोख़ा दिया है
न जाने कई घूँट कड़वे पिया है
जो तुमसाथहोते,कुछ औ बात होती
कभीतुम समझतीं कभी हम समझते
ऋषि राज शंकर 'मुफलिस'
  21/08/2016 सांय 4 बजे 
जब़ भी मेरे ज़ेहन में
तेरा ख्याल आया
इक अक्सधुँधला-धुँधला
खुदके आस-पास पाया
अब कौन सा ग़म मिला है
जो मुस्करा रहे हो
पलकों के पीछे किस तरह
आंसू छिपा रहे हो
चेहरा तुम्हारा सब कुछ
बयान कर रहा है
यूं लग रहा है जैसे कि
ज़ख्म अभी हरा है
यूं हाले दिल को मुझसे
अब छिपा न पाओगे
लगता है साथ अपने
तुम मुझको रूलाओगे
ऋषि राज शंकर 'मुफलिस'
  13/08/2016 रात्रि 8 बजे 
नेता अपना देश लूटने में
हैं सारे व्यस्त
भूख़,गरीबी मंहगाई से
जनता सारी त्रस्त
जनता सारी त्रस्त ,
कोई हमको समझाये
फिर किस कारण से हम
सब15 अगस्त मनायें 
हाई वे पे लुटती इज्जत
नहीं सुरक्षित नारी
चीत्कार करे भारत माता
देख के अबला नारी
दुशाःसन कब फांसी लटके
हमको कोई समझाये
फिर किस कारण से हम
सब15 अगस्त मनायें 
दो सौ बरस गुलामी कर ली
फिर भी समझ न आये
जाति-पांति औ धर्म नाम
पर जनता को लड़वाये
जनता को लड़वाये
कोई इनको समझाये
फिर किस कारण से हम
सब15 अगस्त मनायें 
गांधी और सुभाष की धरती
करती हाहाकार
रिश्वतखोरी और कमीशन
बना एक व्यापार
देश की चिंता नहीं किसी को
भले भाड़ में जाये
भले भाड़ में जाये
कोई इनको समझाये
फिर किस कारण से हम
सब15 अगस्त मनायें 
अपराधों का ग्राफ दिनोदिन
ऊंचा उठता जाये
ध्रतराष्टृ बन गया कुंद प्रशासन
लाज शरम न आये
लाज शर्म न आये सो रहे
इनको कौन उठाये
फिर किस कारण से हम
सब15 अगस्त मनायें 
ऋषि राज शंकर 'मुफलिस'
  14/08/2016 रात्रि 8 बजे 
ज़ख्मों को फिर से अपने
तरोताजा़ कर लें हम
इक मर्तबा फ़िर से नई
पहचान कर लें हम
मंज़र तो रुख़सती का
तुम्हें याद तो होगा
आंसू के क़ाफिले को
फिर सलाम कर लें हम
ऋषि राज शंकर 'मुफलिस'
  10/08/2016 रात्रि 8 बजे