दिल की अभिव्यक्ति

दिल की अभिव्यक्ति
दिल की अभिव्यक्ति

Saturday, April 18, 2020

गरज कर सारी रात वो बरस गए मुझ पर
समझ ना पाये हम,अंदाज़ कातिलाना था
सह गए हम भी इल्जा़मात बड़ी ख़ामोशी से
रह गये चुप मगर बहुत कुछ बताना था

हर पल आस का दीप जलाये
मन में इक विश्वास जगाये
मैं तुझे ढूंढता रहता हूं
कुछ बहका बहका रहता हूं
ना जाने ज़िंदगी में कितने इम्तिहान बाक़ी हैं
अभी छूने को कितने आसमान बाक़ी हैं
थक गया हूं मैं इस बेइंताही दौड़ में अब
ना‌ जाने चढ़ने को कितने पायदान बाक़ी हैं
   ऋषि राज शंकर 'मुफ़लिस'
     प्रातः 8बजे 5/12/2019

ऐ खुदा उस मील के पत्थर को दिखा दे
तुझसे हूं कितना दूर जो अब इसका पता दे
मिलने की तलब तुझसे अब बढ़ती ही जा रही
मुझे ख्वाहिशों से दूर कर ,अपनी पनाह दे
परवरदिगार 'मुफलिस' पे रहमत की मेहर कर
इस पार से उस पार कर जीवन संवार दे
     ऋषि राज शंकर 'मुफ़लिस'
     प्रातः 11बजे 5/12/2019
तुमसे दूरी का सोचूं,तो
प्राण उखड़ने लगता है
दिल में पीड़ा का हल्का
सा दर्द उमड़ने लगता है
इक्कीस बरस गुज़ारे तुमने,
आंखों का तारा बनके
शीघ्र घड़ी वो आयेगी जब
जाओगी डोली सजके
सोच सोच कर विदा घड़ी
मन उचटा उचटा लगता है
    दिल में पीड़ा का हल्का....
कभी बेटी बनके लाड़ किया
कभी मां बन डांट लगाई है
हर लम्हा जीवंत जिया
मेरी दुनिया सुखी बनाई है
जब भी तन्हा मैं बैठूं
सब सपना सपना लगता है
    दिल में पीड़ा का हल्का....
ऋषि राज शंकर 'मुफ़लिस'
     सांयः 9बजे 3/12/2019

Friday, August 16, 2019

मध्यम वर्ग
   ना जाने कितने जन्मों के
  पाप काटता मध्यम वर्ग
  सुबह शाम अभिमन्यु जैसा
  चक्र भांजता मध्यम वर्ग
  सबकी सुनना,कुछ ना कहना
  मजबूरी है, हंसते रहना
  छोटी चादर के भीतर ही
  पाॅंव फैलाता मध्यम वर्ग
  बच्चों को स्कूल भेजना
  कभी बेटी की शादी की
  सारे दिन चिंताओं के
  नित बोझ उठाता मध्यम वर्ग
  खीझा खीझा सा चेहरा है
  उडी़ उड़ी सी रंगत है
  तिनका तिनका आय जोड़के
  घर बनवाता मध्यम वर्ग
  निम्न वर्ग सा जी नहीं सकता
  उच्च वर्ग से प्रतिस्पर्धा
  दो वर्गों के बीच में फंसकर
  पिसता जाता मध्यम वर्ग
  बीवी बच्चे और अधिकारी
  सब इस पर पड़तें हैं भारी
  यस सर,यस मैडम कहने में
  उम्र बिताता मध्यम वर्ग
 
  ऋषि राज शंकर 'मुफ़लिस'
   सांयः 6 बजे 16/08/2019

Monday, March 25, 2019

कोई गिला नहीं है,ना कोई है रंजोगम़
बस तेरी बेरुखी से, आँखें हैं थोड़ी नम
अपनी जगह पे तुम भीसही,मैं भी सही था
फिर किस वजह से अपने,रिश्तों ने तोडा़ दम

ऋषि राज शंकर 'मुफ़लिस'
    दोपहर:2:30 बजे 14/3/2019

मेरा सुकून तुमने गवारा नहीं किया
फिर भी हमने तुमसे किनारा नहीं किया
मैं जानता हूँ तुमने मेरा घर जला दिया
चुप रह गया पर तुम पे इशारा नहीं किया
सब सह गया हूँ,तुमसे मोहब्बत के वास्ते
ऐसा जुनूने इश्क भी दोबारा नहीं किया

ऋषि राज शंकर 'मुफ़लिस'
    दोपहर:2:30 बजे 14/3/2019