दिल की अभिव्यक्ति

दिल की अभिव्यक्ति
दिल की अभिव्यक्ति

Monday, March 25, 2019

कोई गिला नहीं है,ना कोई है रंजोगम़
बस तेरी बेरुखी से, आँखें हैं थोड़ी नम
अपनी जगह पे तुम भीसही,मैं भी सही था
फिर किस वजह से अपने,रिश्तों ने तोडा़ दम

ऋषि राज शंकर 'मुफ़लिस'
    दोपहर:2:30 बजे 14/3/2019

मेरा सुकून तुमने गवारा नहीं किया
फिर भी हमने तुमसे किनारा नहीं किया
मैं जानता हूँ तुमने मेरा घर जला दिया
चुप रह गया पर तुम पे इशारा नहीं किया
सब सह गया हूँ,तुमसे मोहब्बत के वास्ते
ऐसा जुनूने इश्क भी दोबारा नहीं किया

ऋषि राज शंकर 'मुफ़लिस'
    दोपहर:2:30 बजे 14/3/2019
उमड़ चुका है अब सावन इन आँखों मे
रोको मत ,इन अश्कों को बह जाने दो
खामोशी के साथ जुबां को सीकर तुम
 कह ना सके जो लफ्जो़ं में कह जाने दो
समय सगा सा नहीं किसी का कभी हुआ
नई इबारत फिर से अब लिख़ जाने दो
मैने मुठ्ठियों से रेत को
फिसलते हुए देखा है
मंजिलों को हाथ से
छिटकते हुए देखा है
वो झूठ कहता है कि
पत्थर का जिग़र रखता हूँ
तन्हा रातों में उसको भी
सिसकते  हुए देखा है
हमारी कब्र पे ना रोज़ रोज़ आया करो
यूं आशिकी का दर्द और ना बढा़या करो
तेरे नाम पे ही खत्म हुई थी ज़िंदगी मेरी
मेरे हाल पे तुम ऐसे ना मुस्कुराया करो
मोहब्बत में तेरी,गज़लें जो मैंने लिखी हैं
है इल्तिजा़ की कभी उनको गुनगुनाया करो
हमारे दिल के कुछ एक ज़ख्म अभी ताजे़ हैं
कसम खुदा की तुम्हें,मत कुरेद जाया करो
ये "मुफलिसी" ही मेरी उम्र भर की दौलत है
सरे बाज़ार यूं सबको नहीं बताया करो
     ऋषि राज शंकर 'मुफ़लिस'
    दोपहर:2:30 बजे 13/3/2019


आते जाते रहना तुम सब
ये स्कूल तुम्हारा है
सफ़ल रहो जीवन में हर क्षण
ये आशीष हमारा है
अपने जीवन का तुमने,यहाँ
अदभुत् समय बिताया है
बचपन बीता खेल खेल में
पढा़ लिखा कुछ पाया है
अब आगे ही बढ़ते रहना
ये ही लक्ष्य तुम्हारा है
       सफल रहो.........
पढे़ लिखे और हँसी ठिठोली
मिलकर तुम सब साथ किये
थोड़ी बहुत शरारत जब की
हम भी तुमको डाँट दिये
स्मृतियों का गुलदस्ता ये
अब से हुआ तुम्हारा है
       सफल रहो.........
ऋषि राज शंकर 'मुफ़लिस'