कुछ बात अलग थी
उसके अंदाज़े इश्क में
तिरछी नज़र से देख़ना
फिर मुँह को छिपाना
दांत तले होंठों को
धीरे से भींचना
पल्लू को अगुंलियों में
कुछ गोल घुमाना
वो चुपके चुपके आड़
में परदे से देखना
नज़रों को मिला के
नजरों को चुराना
मुझको ख़बर नहीं थी
कि आदत है उसकी ये
बिन बात मुस्करा के
ज़ुल्फों को गिराना
मैं ख़ामख्वाह ही इश्क़
काअंदाज़ समझ बैठा
न भूख लग रही है
न नींद का आना
ऋषि राज शंकर 'मुफलिस'
06/09/2016 प्रातः 6 बजे
उसके अंदाज़े इश्क में
तिरछी नज़र से देख़ना
फिर मुँह को छिपाना
दांत तले होंठों को
धीरे से भींचना
पल्लू को अगुंलियों में
कुछ गोल घुमाना
वो चुपके चुपके आड़
में परदे से देखना
नज़रों को मिला के
नजरों को चुराना
मुझको ख़बर नहीं थी
कि आदत है उसकी ये
बिन बात मुस्करा के
ज़ुल्फों को गिराना
मैं ख़ामख्वाह ही इश्क़
काअंदाज़ समझ बैठा
न भूख लग रही है
न नींद का आना
ऋषि राज शंकर 'मुफलिस'
06/09/2016 प्रातः 6 बजे
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