हम तो बिकने को तैयार थे
चौराहों पर
लेकिन हर खरीदार की
औकात हमसे कम निकली
हवायें रुख़ बदल लेंगी
अगर हम ज़िद पे आ जायें
सियासत भी दहल जाए
अगर हम ज़िद पे आ जायें
हमारे हौसले के आगे
ये संसार झुक जाये
मुकम्मल है यकीं इतना
अगर हम ज़िद पे आ जायें
चौराहों पर
लेकिन हर खरीदार की
औकात हमसे कम निकली
हवायें रुख़ बदल लेंगी
अगर हम ज़िद पे आ जायें
सियासत भी दहल जाए
अगर हम ज़िद पे आ जायें
हमारे हौसले के आगे
ये संसार झुक जाये
मुकम्मल है यकीं इतना
अगर हम ज़िद पे आ जायें
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